सुखी सिर्फ वहीं रह सकता है जो जान गया हो कि दुनिया में हर किसी के पास गम है
अगर किसी परिस्थिति के लिए आपके पास सही शब्द नहीं है तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये, शब्द उलझा सकते है पर मुस्कराहट हमेशा काम कर जाती है
मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है
सुखी सिर्फ वहीं रह सकता है जो जान गया हो कि दुनिया में हर किसी के पास गम है
अगर किसी परिस्थिति के लिए आपके पास सही शब्द नहीं है तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये, शब्द उलझा सकते है पर मुस्कराहट हमेशा काम कर जाती है
मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है, वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है।
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है