इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना

इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना

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अकेलापन सदैव आपका एक महत्पूर्ण व्यक्ति से परिचय करवाएगा और व्यक्ति है.. स्वयं आप

ऊँचे ख्वाबों के लिए... दिल की गहराई से काम करना पड़ता है यूँ ही नहीं मिलती सफलता किसी को.. मेहनत की आग में दिन-रात जलना पड़ता है

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।

इस दुनिया में सब कुछ एकदम से नहीं मिल जाता| परिश्रम करना पड़ता है और वह भी लगन से! सूरज भी एक दम से नहीं उग जाता, वह भी धीरे धीरे उठकर संसार को प्रकाशित करता है। अगर आप में धैर्य है, साहस है तो आप जीवन में नयी ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है

अकेलापन सदैव आपका एक महत्पूर्ण व्यक्ति से परिचय करवाएगा और व्यक्ति है.. स्वयं आप

ऊँचे ख्वाबों के लिए... दिल की गहराई से काम करना पड़ता है यूँ ही नहीं मिलती सफलता किसी को.. मेहनत की आग में दिन-रात जलना पड़ता है

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।

इस दुनिया में सब कुछ एकदम से नहीं मिल जाता| परिश्रम करना पड़ता है और वह भी लगन से! सूरज भी एक दम से नहीं उग जाता, वह भी धीरे धीरे उठकर संसार को प्रकाशित करता है। अगर आप में धैर्य है, साहस है तो आप जीवन में नयी ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है