भीख मांगना मना है सिख नही
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का
भीख मांगना मना है सिख नही
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का