अपने आप को हर परिश्थिति में शांत रहने के लिए तैयार करे.

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यूँ ही हर कदम पर मत लड़खड़ाओ कामयाबी पानी है तो संभल जाओ, मत शोर करो अपने प्रयासों का ख़ामोशी से अपनी जिंदगी बदल जाओ।

. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे

क्षमता और ज्ञान को हमेशा अपना गुरु बनाओ अपना गुरुर नही

ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.

दुबारा गर्म की हुई चाय और समझौता किया हुआ रिश्ता दोनों में पहले जैसी मिठास कभी नही आती

मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों ना हो उसके रास्ते हमेशा पैरों के नीचे से ही जाते है।

यूँ ही हर कदम पर मत लड़खड़ाओ कामयाबी पानी है तो संभल जाओ, मत शोर करो अपने प्रयासों का ख़ामोशी से अपनी जिंदगी बदल जाओ।

. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे

क्षमता और ज्ञान को हमेशा अपना गुरु बनाओ अपना गुरुर नही

ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.

दुबारा गर्म की हुई चाय और समझौता किया हुआ रिश्ता दोनों में पहले जैसी मिठास कभी नही आती

मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों ना हो उसके रास्ते हमेशा पैरों के नीचे से ही जाते है।