भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
सुखी सिर्फ वहीं रह सकता है जो जान गया हो कि दुनिया में हर किसी के पास गम है
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है
अच्छे काम में डर लगे तो याद रखना, यह संकेत है कि आप का काम वाकई में बहादुरी से भरा है अगर इसमें डर और रिस्क नहीं होता तो हर कोई कर लेता
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती
भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
सुखी सिर्फ वहीं रह सकता है जो जान गया हो कि दुनिया में हर किसी के पास गम है
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है
अच्छे काम में डर लगे तो याद रखना, यह संकेत है कि आप का काम वाकई में बहादुरी से भरा है अगर इसमें डर और रिस्क नहीं होता तो हर कोई कर लेता
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती