इस दिल में तुम्हारे सिवा किसी को इजाजत नहीं
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
सोचती हूँ कुछ तो अच्छे करम मैंने भी किए होंगे, यूँ तो नसीब ना होती महोब्बत तुम्हारी!!!
यूँ तो शिकायते तुझ से सैंकड़ों हैं मगर, तेरी एक मुस्कान ही काफी है सुलह के लिये.
अपने वो नहीं होते जो तस्वीरों में साथ खड़े होते हैं, अपने वो होते हैं जो तकलीफ में साथ होते हैं
खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!
इस दिल में तुम्हारे सिवा किसी को इजाजत नहीं
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
सोचती हूँ कुछ तो अच्छे करम मैंने भी किए होंगे, यूँ तो नसीब ना होती महोब्बत तुम्हारी!!!
यूँ तो शिकायते तुझ से सैंकड़ों हैं मगर, तेरी एक मुस्कान ही काफी है सुलह के लिये.
अपने वो नहीं होते जो तस्वीरों में साथ खड़े होते हैं, अपने वो होते हैं जो तकलीफ में साथ होते हैं
खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!