माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।

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जब तकलीफ़ हो जीने में तब शिव को बसा लो सीने में "हर हर महादेव"

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम

फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||

जब तकलीफ़ हो जीने में तब शिव को बसा लो सीने में "हर हर महादेव"

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम

फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||