सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

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प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

"सबसे पहला प्रेम ज़िन्दगी में उससे होना चाहिए, जिसने ये सब कुछ बनाया। उससे होना चाहिए जो बिना मांगे देता है।"

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

"सबसे पहला प्रेम ज़िन्दगी में उससे होना चाहिए, जिसने ये सब कुछ बनाया। उससे होना चाहिए जो बिना मांगे देता है।"