जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥
मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥
मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।