जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥