शरीर जल से पवित्र होता है, मन सत्य से, बुद्धि ग्यान से, और आत्मा धर्म से
काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
नहाए धोए से हरी मिले तो मै नहाऊं सौ बार हरि तो मिले निर्मल हृदय से प्यारे मन का मैल उतार |
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है
शरीर जल से पवित्र होता है, मन सत्य से, बुद्धि ग्यान से, और आत्मा धर्म से
काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
नहाए धोए से हरी मिले तो मै नहाऊं सौ बार हरि तो मिले निर्मल हृदय से प्यारे मन का मैल उतार |
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है