माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
Dear God, thank you for being there when nobody else was.
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !
॥ जय अम्बे गौरी ॥
हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को, पर चमकता तो वही है जो तराशने की हद से गुजरता है. सतनाम श्री वाहेगुरु |
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
Dear God, thank you for being there when nobody else was.
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !
॥ जय अम्बे गौरी ॥
हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को, पर चमकता तो वही है जो तराशने की हद से गुजरता है. सतनाम श्री वाहेगुरु |