खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

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ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है

आपको ज़ीद हे अगर हमे भूलने की तो, हमे भी ज़ीद हे आपको अपनी याद दिलाने की

बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

ए खुदा..!! मुझे प्यार उसी से हो जो.... मुझे पाकर प्यार में पागल हो जाए

ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है

आपको ज़ीद हे अगर हमे भूलने की तो, हमे भी ज़ीद हे आपको अपनी याद दिलाने की

बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

ए खुदा..!! मुझे प्यार उसी से हो जो.... मुझे पाकर प्यार में पागल हो जाए