सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
जरुरी नहीं कि इंसान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खूबसूरत हो, अच्छा तो वही इंसान होता है, जो तब आपके साथ हो, जब आपको उसकी जरुरत हो
खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम
बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
जरुरी नहीं कि इंसान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खूबसूरत हो, अच्छा तो वही इंसान होता है, जो तब आपके साथ हो, जब आपको उसकी जरुरत हो
खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम
बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए