मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
इस दिल में तुम्हारे सिवा किसी को इजाजत नहीं
तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
इस दिल में तुम्हारे सिवा किसी को इजाजत नहीं
तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी