उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती
मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है, जब वो मुस्कुरा के पूछती है, नाराज हो क्या.?
ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है
सुनो… तुम ही रख लो अपना बना कर..औरों ने तो छोड़ दिया तुम्हारा समझकर..!!
ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...
उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती
मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है, जब वो मुस्कुरा के पूछती है, नाराज हो क्या.?
ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है
सुनो… तुम ही रख लो अपना बना कर..औरों ने तो छोड़ दिया तुम्हारा समझकर..!!
ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...