यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.
ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ
मेरी जिंदगी तेरे साथ शुरू तो नहीं हुई पर ख्वाहिश है खत्म तेरे साथ ही हो ?❤️
बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.
ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ
मेरी जिंदगी तेरे साथ शुरू तो नहीं हुई पर ख्वाहिश है खत्म तेरे साथ ही हो ?❤️
बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |