तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो

तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो

Share:

More Like This

उससे बढ़कर मेरी खुशी क्या है, तुम सलामत रहो कमी क्या है,

ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा

मुझसे जब भी मिलो तो नज़रें उठा के मिला करो, मुझे पसंद है अपने आप को तेरी आँखों में देखना

गर्मी तो बोहत पढ़ रही है। फिर भी उनका दिल पिघलने का नाम ही नहीं ले रहा ।

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए

उससे बढ़कर मेरी खुशी क्या है, तुम सलामत रहो कमी क्या है,

ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा

मुझसे जब भी मिलो तो नज़रें उठा के मिला करो, मुझे पसंद है अपने आप को तेरी आँखों में देखना

गर्मी तो बोहत पढ़ रही है। फिर भी उनका दिल पिघलने का नाम ही नहीं ले रहा ।

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए