वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..

वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा

अब तक जिसका खून न खौला, वो खून नहीं वो पानी है जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

करो या मरो- महात्मा गांधी

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा

अब तक जिसका खून न खौला, वो खून नहीं वो पानी है जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

करो या मरो- महात्मा गांधी

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…