जो लोग दूसरों को आजादी नहीं देते, उन्हें खुद भी इसका हक नहीं होता –
गूंज उठता हैं जहां में चारो ओर….. लोगो की जुबान से वन्दे मातरम का नारा
संस्कृति और संस्कार की शान मिले ऐसे हिंदू, मुस्लमान और हिंदुस्तान मिले ऐसे हम मिलजुल कर रहे ऐसे कि मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे
देश भक्तों के बलिदान से स्वतंत्र हुए हैं हम, कोई पूछे कौन हो तो गर्व से कहेंगे भारतीय हैं हम।
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं
जो लोग दूसरों को आजादी नहीं देते, उन्हें खुद भी इसका हक नहीं होता –
गूंज उठता हैं जहां में चारो ओर….. लोगो की जुबान से वन्दे मातरम का नारा
संस्कृति और संस्कार की शान मिले ऐसे हिंदू, मुस्लमान और हिंदुस्तान मिले ऐसे हम मिलजुल कर रहे ऐसे कि मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे
देश भक्तों के बलिदान से स्वतंत्र हुए हैं हम, कोई पूछे कौन हो तो गर्व से कहेंगे भारतीय हैं हम।
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं