मैं हनुमान हूँ इसका ये मेरे श्री राम हैं छाती चीरकर देख लो अंदर बैठा हिंदुस्तान है
जो अब तक ना खौला खून नहीं पानी है जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी है
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
देश को आजादी के नए अफसानों की जरूरत है भगत-आजाद जैसे आजादी के दीवानों की जरूरत है, भारत को फिर देशभक्त परवानों की जरूरत है..!!
शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे, भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे।
मैं हनुमान हूँ इसका ये मेरे श्री राम हैं छाती चीरकर देख लो अंदर बैठा हिंदुस्तान है
जो अब तक ना खौला खून नहीं पानी है जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी है
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
देश को आजादी के नए अफसानों की जरूरत है भगत-आजाद जैसे आजादी के दीवानों की जरूरत है, भारत को फिर देशभक्त परवानों की जरूरत है..!!
शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे, भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे।