ये अगस्त ही वो महीना है तो आजादी की याद दिलाता है उन देशभक्तों की याद दिलाता है जो देश के लिए घर परिवार सब छोड़कर बलिदान हो गये जय हिन्द….
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi
आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…
करो या मरो- महात्मा गांधी
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
भारत की फ़जाओं को सदा याद रहूँगा, आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा।
ये अगस्त ही वो महीना है तो आजादी की याद दिलाता है उन देशभक्तों की याद दिलाता है जो देश के लिए घर परिवार सब छोड़कर बलिदान हो गये जय हिन्द….
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi
आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…
करो या मरो- महात्मा गांधी
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
भारत की फ़जाओं को सदा याद रहूँगा, आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा।