उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती

उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती

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क्या ऐसा नहीं हो सकता हम प्यार मांगे… और तुम गले लगा के कहो, “और कुछ?”

हो जा मेरी कि इतनी मोहब्बत दूँगा तुझे, लोग हसरत करेंगे तेरे जैसा नसीब पाने के लिए..!!

ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

कोई केह दे उन्हें, अपनी ख़ास हिफाजत किया करे,, बेशक साँसे उनकी हे, पर जान तो मेरी हे

खूबसूरती तेरी लोगो को दीवाना बनती हैं, धुप में मानो ठंडक दे जाती हैं, सलामत रहे तेरे होंठो पर हंसी, क्युकी ये हंसी ही तुझको चाँद की तरह खिला जाती हैं

नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...

क्या ऐसा नहीं हो सकता हम प्यार मांगे… और तुम गले लगा के कहो, “और कुछ?”

हो जा मेरी कि इतनी मोहब्बत दूँगा तुझे, लोग हसरत करेंगे तेरे जैसा नसीब पाने के लिए..!!

ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

कोई केह दे उन्हें, अपनी ख़ास हिफाजत किया करे,, बेशक साँसे उनकी हे, पर जान तो मेरी हे

खूबसूरती तेरी लोगो को दीवाना बनती हैं, धुप में मानो ठंडक दे जाती हैं, सलामत रहे तेरे होंठो पर हंसी, क्युकी ये हंसी ही तुझको चाँद की तरह खिला जाती हैं

नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...