उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi
जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा
उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi
जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा