खुशिया मांगी थी मैंने खुदा से अपने लिया और देखो न मुझे तुम मिल गए
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती
उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
उससे बढ़कर मेरी खुशी क्या है, तुम सलामत रहो कमी क्या है,
खुशिया मांगी थी मैंने खुदा से अपने लिया और देखो न मुझे तुम मिल गए
मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती
उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
उससे बढ़कर मेरी खुशी क्या है, तुम सलामत रहो कमी क्या है,