मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
तुम्हारे लिए मैने कुछ खास लिखा है। दूर कब तक रहोगे मुझसे खुदा ने किस्मत में मेरी तुम्हें मेरे पास लिखा हैं।।
“एक बार उसने कहा था मेरे सिवा किसी से प्यार ना करना, बस फिर क्या था तबसे मोहब्बत की नजर से हमने खुद को भी नहीं देखा
कभी-कभी किसी से ऐसा रिश्ता भी बन जाता हैं...कि हर चीज से पहले उसी का ख्याल आता है
कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!
जिनकी संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है, अक्सर वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं।
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
तुम्हारे लिए मैने कुछ खास लिखा है। दूर कब तक रहोगे मुझसे खुदा ने किस्मत में मेरी तुम्हें मेरे पास लिखा हैं।।
“एक बार उसने कहा था मेरे सिवा किसी से प्यार ना करना, बस फिर क्या था तबसे मोहब्बत की नजर से हमने खुद को भी नहीं देखा
कभी-कभी किसी से ऐसा रिश्ता भी बन जाता हैं...कि हर चीज से पहले उसी का ख्याल आता है
कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!
जिनकी संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है, अक्सर वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं।