तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है.... सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर, आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है.
खामोशियाँ बोल देती हैं जिनकी बाते नहीं होती, इश्क़ वो भी करते हैं जिनकी मुलाक़ाते नहीं होती
तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है.... सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर, आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है.
खामोशियाँ बोल देती हैं जिनकी बाते नहीं होती, इश्क़ वो भी करते हैं जिनकी मुलाक़ाते नहीं होती