नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं...जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं..
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…
प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं...जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं..
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…
प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ