कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!

कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!

Share:

More Like This

खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया.. जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था

एक तू और तेरा प्यार, मेरे लिऐ काफी है मेरे यारा...

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

ये जो तुम कहते रहते हो न की खुश रहा करो तो फिर सुन लो हमेशा मेरे पास रहा करो

खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया.. जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था

एक तू और तेरा प्यार, मेरे लिऐ काफी है मेरे यारा...

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

ये जो तुम कहते रहते हो न की खुश रहा करो तो फिर सुन लो हमेशा मेरे पास रहा करो