लिख दू तो लफ्ज़ तुम हो, सोच लू तो ख्याल तुम हो, मांग लू तो मन्नत तुम हो, और चाह लू तो मोहोब्बत भी तुम ही हो

लिख दू तो लफ्ज़ तुम हो, सोच लू तो ख्याल तुम हो, मांग लू तो मन्नत तुम हो, और चाह लू तो मोहोब्बत भी तुम ही हो

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ये जो तुम कहते रहते हो न की खुश रहा करो तो फिर सुन लो हमेशा मेरे पास रहा करो

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है

ये जो तुम कहते रहते हो न की खुश रहा करो तो फिर सुन लो हमेशा मेरे पास रहा करो

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है