पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है.
नींद तो ठीक ठाक आईं पर जैसे ही आँखें खुली, फिर वहीं जिन्दगी और फिर वहीं, पगली याद आईं..
ये अजीब खेल चल रहा है मेरी ज़िन्दगी में जहाँ ” याद ” का लफ्ज़ आ जाए , वहां तुम याद आ जाते हो।
किसी ने कहा इतने तनहा क्यों हो तुम, मैंने कहा उसने सिर्फ इंतजार ही लिखा था मेरे लिए…
तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?
पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है.
नींद तो ठीक ठाक आईं पर जैसे ही आँखें खुली, फिर वहीं जिन्दगी और फिर वहीं, पगली याद आईं..
ये अजीब खेल चल रहा है मेरी ज़िन्दगी में जहाँ ” याद ” का लफ्ज़ आ जाए , वहां तुम याद आ जाते हो।
किसी ने कहा इतने तनहा क्यों हो तुम, मैंने कहा उसने सिर्फ इंतजार ही लिखा था मेरे लिए…
तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?