कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
पता है तुम्हें, मैं बहुत बातें करता हूँ, तुम्हारी चाँद से,अक्सर रातों में. सच्ची ये और बात है, कि मैं बताता नहीं हूँ तुम्हें..
कुछ दिन खामोश होकर देखना, लोग सच में भूल जाते है..
उसकी #Mohabbat पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, #Dil करता है के पूरी उम्र भर उसी का इंतज़ार करूँ….
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..
कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
पता है तुम्हें, मैं बहुत बातें करता हूँ, तुम्हारी चाँद से,अक्सर रातों में. सच्ची ये और बात है, कि मैं बताता नहीं हूँ तुम्हें..
कुछ दिन खामोश होकर देखना, लोग सच में भूल जाते है..
उसकी #Mohabbat पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, #Dil करता है के पूरी उम्र भर उसी का इंतज़ार करूँ….
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..