तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘
-पता नहीं अब हक़ है या नही, पर आज भी तेरी परवाह करना अच्छा लगता हैं ..
“गम हूँ, दर्द हूँ, साज हूँ, या आवाज हूँ, बस जो भी हूँ, मैं तुम बिन बहुत #Sad हूँ ।”
याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें
हम ने कहा अगर हम को भूल सको तो कमाल होगाः, हम ने तो सिर्फ बात की थी तुम ने तो कमाल कर डाला ..
दिल का हाल बताना नही आता, किसी को ऐसे तडपाना नही आता, सुन ना चाहते है एक बार आवाज आपकी, मगर बात करने का बहाना नही आता…!!
तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘
-पता नहीं अब हक़ है या नही, पर आज भी तेरी परवाह करना अच्छा लगता हैं ..
“गम हूँ, दर्द हूँ, साज हूँ, या आवाज हूँ, बस जो भी हूँ, मैं तुम बिन बहुत #Sad हूँ ।”
याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें
हम ने कहा अगर हम को भूल सको तो कमाल होगाः, हम ने तो सिर्फ बात की थी तुम ने तो कमाल कर डाला ..
दिल का हाल बताना नही आता, किसी को ऐसे तडपाना नही आता, सुन ना चाहते है एक बार आवाज आपकी, मगर बात करने का बहाना नही आता…!!