नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
वो जा रहा है छोड़ कर..बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ...?
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
नफरत मत करना हमसे, हमे बुरा लगेगा, बस प्यार से कह देना, अब तेरी जरूरत नहीं हैं .
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
वो जा रहा है छोड़ कर..बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ...?
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
नफरत मत करना हमसे, हमे बुरा लगेगा, बस प्यार से कह देना, अब तेरी जरूरत नहीं हैं .