कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..
यादें कभी फीकी नहीं पड़ती चाहे कितनी ही कोई दूर हो, जाए याद आए तो हमारे दिल में रहती हैं, चाहे कितनी ही बड़ी गलती क्यों ना हो जाए…
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है
तुझे याद करना न करना अब मेरे बस में कहाँ, दिल को आदत है हर धड़कन पे तेरा नाम लेने की..
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..
यादें कभी फीकी नहीं पड़ती चाहे कितनी ही कोई दूर हो, जाए याद आए तो हमारे दिल में रहती हैं, चाहे कितनी ही बड़ी गलती क्यों ना हो जाए…
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है
तुझे याद करना न करना अब मेरे बस में कहाँ, दिल को आदत है हर धड़कन पे तेरा नाम लेने की..