कभी टूटा नहीं मेरे दिल से, उस की याद का रिश्ता, गुफ्तगू जिस से भी हो, ख़याल उस का ही रहता है .. ‘
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नहीं, बस कोई था जिस से यह उम्मीद नहीं थी!!
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..
कभी टूटा नहीं मेरे दिल से, उस की याद का रिश्ता, गुफ्तगू जिस से भी हो, ख़याल उस का ही रहता है .. ‘
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नहीं, बस कोई था जिस से यह उम्मीद नहीं थी!!
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..