बेचकर नीदें अपनी करवटें खरीद ली हमने, सौदागर सा हो गया दिल यादों के मामलें में..

बेचकर नीदें अपनी करवटें खरीद ली हमने, सौदागर सा हो गया दिल यादों के मामलें में..

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मुझे इतना याद आकर बेचैन ना करो तुम, एक यही सितम काफी है कि साथ नहीं हो तुम…

उस मोड़ से शुरू करे फिर से ज़िन्दगी, जब हर शाम हसीन थी और हम-तुम थे अजनबी ..

तेरे बाद नज़र आती नहीं मुझे अब कोई मंज़िल, किसी और का हो जाना अब मेरे बस में ही नहीं ..

तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘

हमे जिसकी याद आती है उसे हमारी कभी याद नहीं आती..

आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..

मुझे इतना याद आकर बेचैन ना करो तुम, एक यही सितम काफी है कि साथ नहीं हो तुम…

उस मोड़ से शुरू करे फिर से ज़िन्दगी, जब हर शाम हसीन थी और हम-तुम थे अजनबी ..

तेरे बाद नज़र आती नहीं मुझे अब कोई मंज़िल, किसी और का हो जाना अब मेरे बस में ही नहीं ..

तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘

हमे जिसकी याद आती है उसे हमारी कभी याद नहीं आती..

आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..