तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?

तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?

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रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!

जिस ने छोड़ दिया मुझी पुराने साल की तरह, उसे नया साल भी मुबारक नए यार भी मुबारक .. ‘

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

उस मोड़ से शुरू करे फिर से ज़िन्दगी, जब हर शाम हसीन थी और हम-तुम थे अजनबी ..

रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!

जिस ने छोड़ दिया मुझी पुराने साल की तरह, उसे नया साल भी मुबारक नए यार भी मुबारक .. ‘

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

उस मोड़ से शुरू करे फिर से ज़िन्दगी, जब हर शाम हसीन थी और हम-तुम थे अजनबी ..