सिर्फ यादों का एक सिलसिला रह गया है, खुदा जाने उनसे मेरा क्या रिश्ता रह गया है.
ये ठंडी सी रात तेरी याद दिलाती हैं मुझसे दूर है तू फिर भी तेरी आहट सुनाती हैं
पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
मुझे इतनी याद आकर बेचैन ना करो, तुम्हारी सितम काफी है कि साथ नहीं तुम.
कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
पगली तुझे हिचकियाँ नहीं आती हैं रातों में, न जाने कितने तुझे याद करते है अपनी तनहाइयो में..
सिर्फ यादों का एक सिलसिला रह गया है, खुदा जाने उनसे मेरा क्या रिश्ता रह गया है.
ये ठंडी सी रात तेरी याद दिलाती हैं मुझसे दूर है तू फिर भी तेरी आहट सुनाती हैं
पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
मुझे इतनी याद आकर बेचैन ना करो, तुम्हारी सितम काफी है कि साथ नहीं तुम.
कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
पगली तुझे हिचकियाँ नहीं आती हैं रातों में, न जाने कितने तुझे याद करते है अपनी तनहाइयो में..