बस जीने ही तो नही देगी.. और क्या कर लेगी यादें तेरी..
सिर्फ यादों का एक सिलसिला रह गया है, खुदा जाने उनसे मेरा क्या रिश्ता रह गया है.
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
तेरी आँख में जो नमी सी छाई है, वो मेरे दूर होने की एकलौती गावहि है, याद इतना न किया करो हमे, हिचकी ले ले कर मेरी जान पे बन जाती है.
कितने चेहरे हैं इस दुनिया में, मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता है, दुनिया को हम क्या देखे, उसकी यादों में सारा वक़्त गुज़र जाता है.
बस जीने ही तो नही देगी.. और क्या कर लेगी यादें तेरी..
सिर्फ यादों का एक सिलसिला रह गया है, खुदा जाने उनसे मेरा क्या रिश्ता रह गया है.
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
तेरी आँख में जो नमी सी छाई है, वो मेरे दूर होने की एकलौती गावहि है, याद इतना न किया करो हमे, हिचकी ले ले कर मेरी जान पे बन जाती है.
कितने चेहरे हैं इस दुनिया में, मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता है, दुनिया को हम क्या देखे, उसकी यादों में सारा वक़्त गुज़र जाता है.