ये आरज़ू नहीं कि किसी को भुलाएं हम. न तमन्ना है किसी को रुलाएं हम. पर दुआ है उस रब से एक ही, जिसको जितना याद करते हैं उसको उतना याद आयें हम.
पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..
कैसे थाम ले किसी और का हाथ अगर वो तनहा मिल गए कही तो हम क्या जवाब देंगे.
कभी किसी का जो होता था इंतज़ार हमें, बड़ा ही शाम-ओ-सहर का हिसाब रखते थे..
होती है बड़ी जालिम एक तरफा मोहब्बत, वो याद तोह आते है पर याद नहीं करते
ये आरज़ू नहीं कि किसी को भुलाएं हम. न तमन्ना है किसी को रुलाएं हम. पर दुआ है उस रब से एक ही, जिसको जितना याद करते हैं उसको उतना याद आयें हम.
पानी की तरह एक दिन तेरी आँखों से बह जाएंगे, हम राख बन चुके होंगे और आप ढूँढ़ते रह जाएंगे..
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..
कैसे थाम ले किसी और का हाथ अगर वो तनहा मिल गए कही तो हम क्या जवाब देंगे.
कभी किसी का जो होता था इंतज़ार हमें, बड़ा ही शाम-ओ-सहर का हिसाब रखते थे..
होती है बड़ी जालिम एक तरफा मोहब्बत, वो याद तोह आते है पर याद नहीं करते