अपनी नाराज़गी की कोई वजह तोह बतायी होती, हम दुनिया छोड़ देते तुझे मनाने के लिये ..

अपनी नाराज़गी की कोई वजह तोह बतायी होती, हम दुनिया छोड़ देते तुझे मनाने के लिये ..

Share:

More Like This

“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”

और #कोई नहीं है जो #मुझको #तसल्ली देता हो…, बस #तेरी #यादें है जो #दिल पर #हाथ रख देती है….

कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं

होती है बड़ी जालिम एक तरफा मोहब्बत, वो याद तोह आते है पर याद नहीं करते

इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा, राते कटती है लेकर नाम तेरा, मुद्दत से बैठा हूँ पलके ये आस, कभी तो आएगा कोई पैग़ाम तेरा..

“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"

“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”

और #कोई नहीं है जो #मुझको #तसल्ली देता हो…, बस #तेरी #यादें है जो #दिल पर #हाथ रख देती है….

कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं

होती है बड़ी जालिम एक तरफा मोहब्बत, वो याद तोह आते है पर याद नहीं करते

इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा, राते कटती है लेकर नाम तेरा, मुद्दत से बैठा हूँ पलके ये आस, कभी तो आएगा कोई पैग़ाम तेरा..

“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"