कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
मजबूरियों के नाम पर दामन चुरा गये, वो लोग जिन की मोहब्बतों में दावे हजार थे..
और #कोई नहीं है जो #मुझको #तसल्ली देता हो…, बस #तेरी #यादें है जो #दिल पर #हाथ रख देती है….
“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है.
कोई मरता नहीं किसी के लिए, यह सच है, कोई जीता है मर मर के किसी के लिए, यह भी सच है..
कभी तो हिसाब करो हमारा भी, इतनी मोहब्बत भला कौन देता है उधार में..
मजबूरियों के नाम पर दामन चुरा गये, वो लोग जिन की मोहब्बतों में दावे हजार थे..
और #कोई नहीं है जो #मुझको #तसल्ली देता हो…, बस #तेरी #यादें है जो #दिल पर #हाथ रख देती है….
“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है.
कोई मरता नहीं किसी के लिए, यह सच है, कोई जीता है मर मर के किसी के लिए, यह भी सच है..