कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||
हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||
हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं