आसमाँन वीरान है… तारे भी हैरान है… माफ़ कर दो मेरी चांदनी… देखो तेरा चाँद भी तो आंसुओ से परेशान है..
रूठ कर हमसे यूँ दूर जा बैठे हैं कहीं उनकी यादें सता रही हैं हमें हर वक्त यहीं कोई उनसे हमारी खता तो पूछ आइये हम सर झुकाये इंतजार में बैठे हैं यही
चाँद तो हमसे दूर हैं, हम तो तेरे नूर पर फ़िदा हैं, ना जाने तू रूठा क्यूँ हैं हमसे, फिर भी सजा पाने खड़े हैं कबसे..
सितम सारे हमारे, छाँट लिया करो, नाराजगी से अच्छा, डांट लिया करो!!
इस कदर हमसे रूठ ना जाइये, माना गलती हुई हैं हमसे, पर ऐसे खामोश ना हो जाइये, जो दोगे सजा होगी क़ुबूल हमें, बस एक बार मुस्कुरा जाइये
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
आसमाँन वीरान है… तारे भी हैरान है… माफ़ कर दो मेरी चांदनी… देखो तेरा चाँद भी तो आंसुओ से परेशान है..
रूठ कर हमसे यूँ दूर जा बैठे हैं कहीं उनकी यादें सता रही हैं हमें हर वक्त यहीं कोई उनसे हमारी खता तो पूछ आइये हम सर झुकाये इंतजार में बैठे हैं यही
चाँद तो हमसे दूर हैं, हम तो तेरे नूर पर फ़िदा हैं, ना जाने तू रूठा क्यूँ हैं हमसे, फिर भी सजा पाने खड़े हैं कबसे..
सितम सारे हमारे, छाँट लिया करो, नाराजगी से अच्छा, डांट लिया करो!!
इस कदर हमसे रूठ ना जाइये, माना गलती हुई हैं हमसे, पर ऐसे खामोश ना हो जाइये, जो दोगे सजा होगी क़ुबूल हमें, बस एक बार मुस्कुरा जाइये
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.