ये माना कि बड़े ही बदनाम है हम, कर जाते ह सररत क्यू की इंसान है हम, लगाया न करिये हमारी बातों को दिलसे, आपको तो पता ह कितने नादान हैं हम! सॉरी :
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
अगर तुम देखना चाहो मेरे आँखों मै आंसु, तो मै रो रो के कहता हूं “चलो बस अब मान जाओ न”
उसकी खुशियों के लिए लड़ें थे दुनियाँ से, आज वो ही हमसे खफ़ा बैठे हैं, क्या गुनाह हो गया हैं हमसे, हम सर झुकायें सजा पाने बैठे हैं.
इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना जिंदगी में कोई कमी तो नहीं, फिर भी तेरे बिना जिंदगी उदास रहती है!!
रूठ कर हमसे यूँ दूर जा बैठे हैं कहीं उनकी यादें सता रही हैं हमें हर वक्त यहीं कोई उनसे हमारी खता तो पूछ आइये हम सर झुकाये इंतजार में बैठे हैं यही
ये माना कि बड़े ही बदनाम है हम, कर जाते ह सररत क्यू की इंसान है हम, लगाया न करिये हमारी बातों को दिलसे, आपको तो पता ह कितने नादान हैं हम! सॉरी :
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
अगर तुम देखना चाहो मेरे आँखों मै आंसु, तो मै रो रो के कहता हूं “चलो बस अब मान जाओ न”
उसकी खुशियों के लिए लड़ें थे दुनियाँ से, आज वो ही हमसे खफ़ा बैठे हैं, क्या गुनाह हो गया हैं हमसे, हम सर झुकायें सजा पाने बैठे हैं.
इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना जिंदगी में कोई कमी तो नहीं, फिर भी तेरे बिना जिंदगी उदास रहती है!!
रूठ कर हमसे यूँ दूर जा बैठे हैं कहीं उनकी यादें सता रही हैं हमें हर वक्त यहीं कोई उनसे हमारी खता तो पूछ आइये हम सर झुकाये इंतजार में बैठे हैं यही