उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती
अपनापन छलके जिस की बातों में .. सिर्फ़ कुछ ही बंदे होते है लाखों में
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
मेरे इस दिल को तुम ही रख लो, बड़ी फ़िक्र रहती है इसे तुम्हारी..!
कुछ तो सोचा होगा किस्मत ने तेरे मेरे बारे मैं, वरना इतनी बड़ी दुनिया में तुमसे ही मोहब्बत क्यों हुई
नफ़रत सी हो गई हैँ इस दुनिया से, एक तुम से मोहब्बत करके
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती
अपनापन छलके जिस की बातों में .. सिर्फ़ कुछ ही बंदे होते है लाखों में
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
मेरे इस दिल को तुम ही रख लो, बड़ी फ़िक्र रहती है इसे तुम्हारी..!
कुछ तो सोचा होगा किस्मत ने तेरे मेरे बारे मैं, वरना इतनी बड़ी दुनिया में तुमसे ही मोहब्बत क्यों हुई
नफ़रत सी हो गई हैँ इस दुनिया से, एक तुम से मोहब्बत करके