कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना

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उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती

कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !

खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो

तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी

उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे, ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती

कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !

खुद ही पागल करते हो फिर कहते हो पागल हो तुम

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो

तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी