सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

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जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...