हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.
दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
जब दो लोगो के बीच में तीसरा इंसान आ जाता है तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती है
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.
दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
जब दो लोगो के बीच में तीसरा इंसान आ जाता है तो दूरियां अपने आप बढ़ जाती है