वो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से, वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने से
एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!
वो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से, वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने से
एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!