लाख कसमे देदो किसी को मगर छोड़ने वाले छोड़ ही जाते है `

लाख कसमे देदो किसी को मगर छोड़ने वाले छोड़ ही जाते है `

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वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…