किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..
नसीहत अच्छी देती है दुनिया अगर दर्द किसी ग़ैर का हो
शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी
तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
किसी ने क्या खूब कहा है - अकड़ तो सब में होती है .. झुकता वही है जिसे रिश्तो की फ़िक्र होती है..
नसीहत अच्छी देती है दुनिया अगर दर्द किसी ग़ैर का हो
शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी
तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा