बडा गजब कीरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है पर ख़त्म नहीं....
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||
साथी तो मुझे अपने सुख के लिए चाहिए दुखों के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ !!
बडा गजब कीरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है पर ख़त्म नहीं....
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||
साथी तो मुझे अपने सुख के लिए चाहिए दुखों के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ !!