नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।
वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।
अकड़ तोड़नी है उन्न मंज़िलों की, जिनको अपनी ऊंचाई पर गुरुर है !!
भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.
इज्जत किसी इंसान की नहीं होती हैं, ज़रूरत की होती हैं. ज़रूरत खत्म तो इज्जत खत्म
नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।
वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।
अकड़ तोड़नी है उन्न मंज़िलों की, जिनको अपनी ऊंचाई पर गुरुर है !!
भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.
इज्जत किसी इंसान की नहीं होती हैं, ज़रूरत की होती हैं. ज़रूरत खत्म तो इज्जत खत्म